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मुनाफावसूली, वैश्विक संकेतों ने इक्विटी सूचकांकों को धीमा किया ,धातु शेयरों में गिरावट (राउंडअप) : Shivpurinews.in

मुंबई:
नकारात्मक वैश्विक संकेतों के साथ मुनाफावसूली के कारण शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी में मंदी का दौर रहा।

नतीजतन, पांच सत्रों की बढ़त के बाद सेंसेक्स और निफ्टी 12.27 अंक और 2.05 अंक नीचे 61,223.03 और 18,255.75 अंक पर बंद हुए।

शुरू में दोनों सूचकांकों में अंतर था और सुबह इसमें काफी कमी आई थी। हालांकि थोक मुद्रास्फीति में नरमी और निर्यात के मजबूत आंकड़ों से सूचकांकों को अपने कुछ घाटे को कम करने में मदद मिली।

अमेरिका में ब्याज दरों में वृद्धि के संकेतों से एशिया में शेयर बाजार सहमे रहे और शुक्रवार को इसमें बड़ा नुकसान दर्ज किया गया।

इसी तरह, यूरोपीय शेयरों में शुक्रवार को शुरूआती कारोबार में उस समय गिरावट दर्ज की गई जब अधिक यूएस फेड नीति निमार्ताओं ने संकेत दिया कि वे मुद्रास्फीति से निपटने के लिए मार्च में अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ाना शुरू कर देंगे।

घरेलू मोर्चे पर कारोबार औसत ही रहा। रियल्टी, कैपिटल गुड्स और आईटी इंडेक्स में सबसे ज्यादा तेजी आई, जबकि मेटल, टेलीकॉम, एफएमसीजी और हेल्थकेयर इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट आई।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के रिटेल रिसर्च के प्रमुख दीपक जसानी ने कहा, निफ्टी पांच दिनों की बढ़त के बाद स्थिर ही बंद हुआ, जो कि मंदी से बेहतर तरीके से उबर रहा है।

उन्होंने कहा, निफ्टी निचले स्तर पर खुला और सुबह जल्दी गिर गया। सुबह 11.30 बजे तेजी से गिरावट के बाद, निफ्टी दिन भर ऊपर चढ़कर लगभग स्थिर होकर बंद हुआ।

उन्होंने कहा, निफ्टी लगातार चौथे सप्ताह बढ़ा और 24 सितंबर, 2021 को समाप्त सप्ताह के बाद से सबसे लंबी बढ़त के बाद 2.49 प्रतिशत की वृद्धि हुई। निफ्टी अब 18,500-18,600 के करीब है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिटेल रिसर्च के प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के अनुसार: वैश्विक बाजारों में बिकवाली जारी रही और यूएस फेड के कई अधिकारियों ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए तेजी से ब्याज दरों में बढ़ोतरी का संकेत दिया।

अमेरिका में रिकॉर्ड उच्च मुद्रास्फीति का अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा: वैश्विक बाजारों में घबराहट के बाद भारतीय बाजार कमजोर रूझान पर खुले। आईटी, रियल्टी में सकारात्मक रुझानों के साथ यह अपने अधिकांश नुकसान को स्थिर करने में कामयाब रहा।

अमेरिकी फेड के अधिकारियों की मार्च में संभावित बढ़ोत्तरी पर नवीनतम टिप्पणियों ने वैश्विक इक्विटी में बिक्री को गति दी। अमेरिका में 40 वर्षों की उच्च सीपीआई मुद्रास्फीति दर की सूचना के बाद वैश्विक स्तर पर, मुद्रास्फीति संबंधी चितांए बढ़ गई है हालांकि उत्पादक वस्तुओं की कीमतों में धीमी वृद्धि ने कुछ राहत प्रदान की।

-आईएएनएस

जेके

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.



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