Corona: डेल्टा+ वेरिएंट का खतरा, 22 केस मिलते ही सरकार ने 3 राज्यों को लिखी चिट्ठी

नई दिल्ली: भारत में डेल्टा प्लस वेरिएंट (Delta Variant) के अब तक 22 मामले मिल चुके हैं. सबसे ज्यादा 16 केस सिर्फ महाराष्ट्र (Maharashtra) से सामने आए हैं, जबकि बाकी मामले मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और केरल (Kerala) में मिले हैं. इससे चिंतित स्वास्थ्य मंत्रालय ने तीनों राज्यों को चिट्ठी लिखकर स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है ताकि केसों की संख्या यहीं रोकी जा सके.

9 देशों में फैला डेल्टा प्लस वेरिएंट

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि, ‘भारत उन 9 देशों में से एक है जहां अब तक डेल्टा प्लस वेरिएंट मिला है. हालांकि इसे अभी तक चिंताजनक वेरिएंट की कैटेगरी में नहीं लिया गया है. जबकि 80 देशों में डेल्टा वेरिएंट का पता चला है. भारत से पहले ये वेरिएंट अमेरिका, ब्रिटेन, पुर्तगाल, स्विट्जरलैंड, जापान, पोलैंड, नेपाल, चीन और रूस में मिला है. भारत में डेल्टा प्लस वेरिएंट के मामले महाराष्ट्र के रत्नागिरी और जलगांव तथा केरल और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मिले हैं.’

ये भी पढ़ें:- चंद्रमा के संचार से बन रहा ‘खास’ योग, सभी 12 राशियों पर पड़ेगा इसका असर

‘यह वेरिएंट अभी चिंताजनक श्रेणी में नहीं’

भूषण ने कहा, ‘किसी भी वेरिएंट के प्रसार और गंभीरता से यह तय होता है कि यह चिंताजनक वेरिएंट है या नहीं. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया के बारे में एक परामर्श जारी किया है कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और केरल को इस मुद्दे को हल करने के लिए पहल करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अभी संख्या के लिहाज से यह काफी छोटा दिखता है और हम नहीं चाहते कि इसमें वृद्धि हो. 

28 लैबों में 45 हजार सैंपलों को किया टेस्ट

स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि INSACOG की 28 लैब हैं और उन्होंने 45,000 सैंपलों का अनुक्रमण किया है. इनमें से डेल्टा प्लस स्वरूप के 22 मामले सामने आए. भारतीय सार्स कोव-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) नेशनल लेबोरेटरीज का एक समूह है जिसे केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने गठित किया है. INSACOG वायरस के नए वेरिएंट तथा महामारी के साथ उनके संबंधों का पता लगा रहा है.

ये भी पढ़ें:- अगले महीने आएंगे ‘रोमियो’, समंदर में मजबूत होगी भारत की तैयारी

क्या डेल्टा प्लस वेरिएंट से लड़ पाएगी वैक्सीन?

मोटे तौर पर, दोनों भारतीय वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन, डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी हैं. लेकिन वे किस हद तक और किस अनुपात में एंटीबॉडी बना पाते हैं, इसकी जानकारी बहुत जल्द साझा की जाएगी. देश में महामारी की समग्र स्थिति पर नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वीके पॉल ने कहा कि महामारी की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है. लेकिन उन्होंने जोर दिया कि लोगों को कोविड-19 उपयुक्त व्यवहार का पालन जारी रखना चाहिए और भीड़ तथा पार्टियों से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि टीकाकरण की मात्रा बढ़ानी होगी.

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी भी है बेअसर

उन्होंने कहा कि 100 से अधिक दैनिक मामलों वाले जिलों की संख्या 531 (20 मई को समाप्त सप्ताह में) से घटकर 135 रह गई है जो आश्वस्त करने वाली है. उन्होंने कहा, ‘लेकिन प्रतिबंधों में ढील से हमारी जिम्मेदारी बढ़ जाती है.’ भूषण ने कहा कि सात मई को सामने आए अधिकतम मामलों की तुलना में अब करीब 90 प्रतिशत की गिरावट आई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस के नए वेरिएंट डेल्टा प्लस को अब वैरीअंट ऑफ कंसर्न की श्रेणी में रखा है. इसकी वजह है कि यह तेजी से फैलता है, और सीधा फेफड़ों पर असर करता है. साथ ही मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को तेजी से कम करता है. यानी ये इलाज इस पर बेअसर है.

LIVE TV

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *