प्रश्नपत्र का लिंक क्लिक करते ही उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय की वेबसाइट क्रेश, 6000 स्टूडेंट्स हुए परेशान

उज्जैन. उज्जैन के विक्रम विश्व विद्यालय की परीक्षा  वेब साइट (website) आज क्रेश कर गयी. यूनिवर्सिटी की आज विभिन्न विषयों के MA और MBA चौथे सेमेस्टर के पेपर जारी किये जाना थे. इसमें 6 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स शामिल हो रहे थे. दोनों कोर्स के पेपर अपलोड किये जा चुके थे. लेकिन जैसे ही स्टूडेंट्स ने लिंक (link) क्लिक की वैसे ही ओवर सर्च होने के कारण साइट क्रेश कर गयी.

विक्रम विश्विद्यालय की आज की दो अलग-अलग कोर्स की ऑनलाइन परीक्षा थी. प्रश्न पत्र अपलोड किये जा चुके थे और परीक्षा शुरू होने वाली थी. विद्यार्थियों ने जैसे ही साइट की लिंक खोली वो अधिक सर्च होने के कारण क्रेश हो गयी. आज के इन पेपर्स के प्रश्नों के जवाब लिखकर विद्यार्थियों को 3 जुलाई तक कॉलेजों में जमा करना हैं. 27 जून को चौथे सेमेस्टर की परीक्षा के प्रश्न पत्र विक्रम विश्व विधायालय ने रात 12 बजे वेब साइट पर अपलोड किये गए. सुबह होते ही जैसे ही छात्रों ने साइट खोलना शुरू किया लेकिन सब परेशान हो उठे. साइट खुल ही नहीं रही थी. थोड़ी देर में समझ आया कि साइट ओवर सर्च करने के कारण क्रेश हो चुकी थी.

We’ll be back soon!

उज्जैन विक्रम विश्व विद्यालय में आज से शुरू हुई परीक्षाओं के बीच बड़ी लापरवाही देखने को मिली. https://vikramuniv.ac.in पर सोमवार रात 12 बजे डाले गए पेपर अल सुबह तक साइट पर थे. लेकिन 10 बजे बाद वेब साइट पर लोड बढ़ा और वो क्रेश हो गयी और उस पर We’ll be back soon! का एरर मैसेज दिखाई देने लगा.

आज होने थे ये पेपर

साइट क्रेश हो जाने के बाद एमए हिंदी, संस्कृत, मराठी, अंग्रेजी, उर्दू , एमए दर्शन शास्त्र ,एमए संगीत ,एमए चित्रकला , एमए समाज शास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, भूगोल, मनोविज्ञान, एमए लोक प्रशासन सहित एम एस डब्ल्यू और एमबीए न्यू कोर्स , एमबीए ओल्ड कोर्स का पेपर आज था. जब 2 बजे तक साइट ठीक नहीं हुई तो विक्रम के अधिकारियों ने एक नयी साइट https://vikramexams.com पर प्रश्न पत्र डाल दिए. हालांकि इस वेब साइट के बारे में विद्यार्थियों को पता नहीं था. इसलिए बहुत कम ही छात्र प्रश्न पत्र देख सके.

विवि प्रशासन ने मानी चूक

कुलपति अखिलेश कुमार पांडेय ने गलती स्वीकार करते हुए कहा हमने दूसरी वेब साइट पर भी प्रश्न पत्र डाले हैं लेकिन इतने कम वक्त में हम इसकी सूचना विद्यार्थियों तक नहीं पहुंचा सके. अब हमने प्रश्न पत्र कॉलेज के प्रिंसिपल को भी भिजवा दिए हैं. कुलपति ने ये भी कहा कि वेब साइट को स्टूडेंट्स के अलावा उनके परिवार के लोग भी खोलने लगे थे. इसलिए लोड बढ़ गया.

एंटायर टेक्नोलॉजी के हाथ है मैंटेनेंस
विक्रम विश्व विद्यालय की वेब साइट की मेन्टेनेंस का काम उज्जैन की एंटायर टेक्नोलॉजी नामक कंपनी के हाथ में हैं. साइट के रख रखाव के लिए विवि हर साल 60 हजार रुपये इस कंपनी को देता है. वेब साइट की स्पेस क्षमता बढ़ाने के लिए हाल ही में कंपनी को ढाई लाख रुपये अलग से दिये गए हैं.

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