UP: जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव नहीं लड़ेगी BSP, क्या Mayawati के ऐलान से BJP को होगा फायदा?

UP: जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव नहीं लड़ेगी BSP, क्या Mayawati के ऐलान से BJP को होगा फायदा?

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) अध्यक्ष मायावती (Mayawati) ने सोमवार को कहा की उनकी पार्टी ने उत्तर प्रदेश जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. लेकिन क्या इस फैसले से जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में बीजेपी (BJP) को फायदा होगा?

ये चुनाव निष्पक्ष नहीं: मायावती

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) ने कहा, ‘ये चुनाव निष्पक्ष नहीं हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि वे इस चुनाव में अपना समय और ताकत लगाने के बजाय पार्टी को मजबूत बनाने और सर्व समाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने में लगाएं.’ उन्होंने कहा, ‘आगामी विधान सभा चुनाव के बाद प्रदेश में बसपा की सरकार बनी तो अधिकांश जिला पंचायत अध्यक्ष खुद ही बसपा में शामिल हो जाएंगे.’

किसे वोट करेंगे बीएसपी के 368 जिला पंचायत सदस्य 

मायावती (Mayawati) के चुनाव नहीं लड़ने के ऐलान के बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) के लगभग 368 जिला पंचायत सदस्य किसे वोट करेंगे, इसी पर यूपी की निगाहें टिकी हुई है. लेकिन इतना तय है कि बीएसपी के जिला पंचायत सदस्य सपा को वोट नहीं करेंगे, क्योंकि लोक सभा चुनाव के बाद से मायावती सपा से बहुत गुस्से में हैं और वो लगातार हमला बोलती रहती हैं. जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में बीजेपी और सपा ही सिर्फ चुनावी मैदान में हैं तो बीजेपी को फायदा होना तय माना जा रहा है.

2022 के विधान सभा चुनाव की तैयारी में जुटी बसपा

बता दें कि उत्तर प्रदेश जिला पंचायत अध्यक्ष पद के शनिवार को चुनाव होने हैं. मायावती (Mayawati) ने कहा कि विपक्षी दल अफवाह फैला रहे हैं कि बसपा साल 2022 के विधान सभा चुनावों को लेकर सक्रिय नहीं है, जबकि सच्चाई यह है कि वह स्वयं और पार्टी कार्यकर्ता पिछले साल से ही इन चुनाव की तैयारी में जुटे हैं.

मजबूत होने के बाद भी बीएसपी ने नहीं उतारे प्रत्याशी

बीएसपी (BSP) ने कई जिलों मजबूत होने के बावजूद प्रत्याशी नहीं उतारे. बलिया में बीएसपी के एक विधायक बीजेपी प्रत्याशी की मदद कर रहे हैं. गाजियाबाद में बीएसपी सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन पार्टी ने अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा तो बीजेपी निर्विरोध चुनाव जीत गई. मथुरा में भी बीएसपी सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन पार्टी ने प्रत्याशी नहीं उतारा.

निर्विरोध जीत चुके हैं 16 जिला पंचायत अध्यक्ष

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव सत्ता का चुनाव माना जाता है और कहा जाता है कि जिसकी सरकार होती है उसके ही ज्यादा जिला पंचायत अध्यक्ष बनते हैं. बीजेपी के अब तक 16 जिला पंचायत अध्यक्ष निर्विरोध जीत चुके हैं. बदले समीकरणों के बाद निर्दलीय और अन्य सदस्यों के माध्यम से लगभग 60-65 सीटें आसानी से बीजेपी जीत सकती है.

2015 में 38-39 सीटों पर निर्विरोध चुनी गई थी सपा

2015 में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में जब अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की सरकार यूपी में थी, तो सपा 38-39 सीटें निर्विरोध जीत गई थी और लगभग 60-64 जिला पंचायत अध्यक्ष की सीटों पर कब्जा किया था.

चुनावी प्रक्रिया में बदलाव की मांग

यह बाहुबल का भी चुनाव माना जाता है. पिछले कई सालों से लोग यह मांग भी कर रहे हैं कि जिला पंचायत अध्यक्ष की चुनावी प्रक्रिया में बदलाव लाना चाहिए. यह चुनाव भी मेयर की तर्ज पर सीधे जनता से वोटिंग करानी चाहिए. ताकि भ्रष्टाचार, बाहुबल, धनबल के प्रयोग को रोका जा सके.

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