DNA ANALYSIS: प्राइवेसी पर Google का डाका, जानिए कैसे आपकी बातें सुन रही टेक कंपनी

नई दिल्ली: आपमें से बहुत सारे लोगों को ये लगता होगा कि आपका फोन आपकी बातें सुनता है. आप अपने फोन पर क्या बातें करते हैं? क्या देखते हैं? क्या सुनते हैं और क्या सर्च करते हैं? ऐसा लगता है कि ये सारा डेटा कहीं न कहीं पर स्टोर हो रहा है.

उदहारण के लिए आपको अपने बच्चे का एडमिशन एक प्राइवेट कॉलेज में कराना है और आपने इसके बारे में थोड़ी सी रिसर्च की है या आपके बाल तेजी से गिर रहे हैं और आपने इसकी दवाई को लेकर किसी से बात की है या आपको कोई नई गाड़ी खरीदनी है और आपने इस पर किसी से पूछा है तो इसके कुछ ही घंटों के बाद आपके फोन में प्राइवेट कॉलेज, बालों की दवाई और नई गाड़ियों के विज्ञापन आने लगेंगे और आपको ये हैरानी होगी कि फोन को कैसे पता चला कि आप क्या ढूंढ रहे हैं.

इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय की भारत की संसदीय समिति ने गूगल से यही सवाल पूछा कि क्या आप अपने यूजर्स की बातचीत सुनते हैं. इस पर गूगल ने शायद पहली बार स्वीकार किया कि वो अपने यूजर्स की बातचीत सुनता है. सबसे पहले आपको बताते हैं कि ये पूरी खबर क्या है?

Google सुनता है आपकी बातें

29 जून को केन्द्रीय आईटी मंत्रालय की संसदीय समिति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग को लेकर एक बैठक बुलाई थी, जिसमें टेक्नोलॉजी कंपनी गूगल और फेसबुक के प्रतिनिधि इस समिति के सामने पेश हुए. इस दौरान गूगल से संसदीय समिति ने कहा कि उन्हें गूगल की कुछ सेवाओं पर संदेह होता है और ऐसा लगता है कि गूगल भारतीय यूजर्स की बातें सुनता है. इस पर बैठक में गूगल ने ये बात मानी कि कंपनी अपने यूजर्स की कुछ बातें सुनती है, लेकिन संवेदनशील बातों को नहीं सुना जाता.

गूगल के इस जवाब पर संसदीय समिति के सदस्यों को हैरानी हुई और समिति ने पूछा कि गूगल ये कैसे तय करता है कि उसके किस यूजर की कौन सी बात संवेदनशील है और कौन सी नहीं? लेकिन गूगल के पास इस सवाल का कोई ठोस जवाब नहीं था, जिसके बाद संसदीय समिति ने इस पर अगली बैठक में आईटी मंत्रालय को उपस्थित रहने के लिए कहा और इस पूरे मामले पर चिंता जताई.

एक लाइन में कहें तो संसदीय समिति इस बात से चिंता में पड़ गई कि गूगल भारतीय यूजर्स की बातें सुनता है और इसीलिए इस मामले में अब आईटी मंत्रालय के दखल के लिए अगली बैठक रखी गई है.

भारत के Information Technology Act, 2000 में कहीं इस बात का उल्लेख नहीं मिलता कि टेक्नोलॉजी कंपनियां अपने यूजर्स की बातें सुन सकती हैं.

यहां समझने वाली एक बात ये भी है कि ये बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां खुद ये दावा करती हैं कि वो अपने यूजर्स के मैसेज और वॉयस कॉल का डेटा जमा नहीं करती. वॉट्सऐप ने तो इसके लिए वर्ष 2016 में ही End To End Encryption Policy लागू की थी, जिसका मतलब होता है कि  वाट्सऐप पर किसी व्यक्ति का भेजा गया मैसेज दो ही लोग पढ़ सकते हैं, एक भेजने वाला और दूसरा जिसे वो मैसेज भेजा गया है.

केन्द्र सरकार ने जब इसी साल 25 फरवरी को नए नियम बनाते हुए वॉट्सऐप से कहा था कि वो संवेदनशील मामलों में First originator यानी पहली बार वो मैसेज किसने भेजा, उसके बारे में सरकार को बताए, तो वॉट्सऐप ने अपने यूजर्स की प्राइवेसी की आड़ लेकर इससे बचने के लिए कोर्ट का रुख किया.

प्राइवेसी को लेकर दावों में कितना सच

ये सब बातें हम आपको इसलिए बता रहे हैं ताकि आप ये समझ सकें कि ये कंपनियां आपकी प्राइवेसी को लेकर जो दावे करती हैं, वो सही नहीं है. सच वो है जो गूगल ने संसदीय समिति की बैठक के सामने माना.

हालांकि आपके मन में ये सवाल होगा कि गूगल के तो कई एप्स और सेवाएं हैं, इनमें से किसके माध्यम से यूजर्स की बात सुनी जाती है?

तो ऐसी कई रिपोर्ट्स हैं, जिनमें ये बात सामने आई है कि गूगल असीस्टेंट पर कही जाने वाली बातों को गूगल सुनता है. गूगल असीस्टेंट एक ऐसा फीचर है, जिसकी मदद से आप बिना कुछ 
टाइप किए सिर्फ बोल कर किसी भी वेबसाइट और दूसरी चीज को गूगल सर्च इंजन पर खोल कर सकते हैं और गूगल की इसे लेकर एक पॉलिसी भी है.

ये पॉलिसी कहती है कि गूगल यूजर्स और गूगल असीस्टेंट के बीच जो बातें होती हैं, उन्हें कंपनी रिकॉर्ड करती है. लेकिन इस पॉलिसी में कहीं ये नहीं लिखा कि कंपनी रिकॉर्ड की गई इन बातों को सुनती है या नहीं. हालांकि अब कंपनी ने इस बात को मान लिया है कि वो इन बातों को सुनती है. 

यहां चौकाने वाली एक जानकारी ये भी है कि गूगल ने संसदीय समिति के सामने इस बात को माना है कि कई मामलों में गूगल असीस्टेंट का इस्तेमाल किए बिना भी उसके यूजर द्वारा कही गई बातें सिस्टम में रिकॉर्ड हो सकती हैं.

ये प्राइवेसी का उल्लंघन कैसे हुआ?

हालांकि आपके मन में बात जरूर होगी कि ये प्राइवेसी का उल्लंघन कैसे हुआ? तो हम इसे एक उदाहरण के जरिए आपको समझाना चाहते हैं. अमेरिका में कुछ समय पहले एक महिला अपने पति को सरप्राइज देना चाहती थी कि वो प्रेग्नेंट है. उसने इसके बाद इसी तरह के फीचर पर जाकर प्रेग्नेंसी से संबंधित प्रोडक्ट्स के बारे में पढ़ना शुरू कर दिया और इसके बाद उसने जो सर्च किया था, उसके विज्ञापन उसके घर के होम डिवाइसेज पर आने लगे और महिला के पति को पता चल गया कि उसकी पत्नी प्रेग्नेंट है. यानी उस महिला ने जिस बात को सबसे छिपा कर रखा, उस बात को कंपनी ने दूसरी कंपनियों को बेच दिया.

जनवरी 2019 में बेल्जियम के एक न्यूज़ चैनल ने डच भाषा में की गई कई रिकॉर्डिंग्स को चैनल पर चला दिया था. इसके बाद तब वहां गूगल ने माना था कि ये सभी रिकॉर्डिंग्स उसके द्वारा की गई थीं, जो बाद में लीक हो गईं. उस समय ये बात भी सामने आई थी कि हर हजार रिकॉर्डिंग्स में से 153 रिकॉर्डिंग्स ऐसी होती हैं, जो बिना गूगल असीस्टेंट का इस्तेमाल किए सिस्टम में दर्ज हो जाती हैं.

सोचिए, लोगों की प्राइवेसी रही कहां?

डेटा को चुराने का ये पहला मामला नहीं 

गूगल पर लोगों की बातों को सुनने और उनके डेटा को चुराने का ये पहला मामला नहीं हैं. हम आपको संक्षेप में 3 पॉइंट्स के जरिए बताते हैं कि कैसे गूगल पर गंभीर आरोप लग चुके हैं और कंपनी ने इस पर कई देशों में भारी जुर्माना भरा है.

– 2018 में अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया था कि गूगल, जी मेल पर अपने यूजर्स के इनबॉक्स को स्कैन करता है और फिर ये डेटा बड़ी बड़ी कंपनियों को बेचा जाता है.

– जनवरी 2019 में फ्रांस की सरकार ने गूगल पर लोगों का डेटा इकट्ठा करने के लिए 50 मिलियन यूरो यानी 440 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था. इसके अलावा दिसम्बर 2020 में भी यूजर्स का डेटा बड़ी बड़ी कंपनियों को बेचने के लिए फ्रांस ने गूगल पर 100 मिलियन यूरो यानी 880 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था.

– सितंबर 2019 में अमेरिका में Youtube पर आरोप लगा था कि उसने बच्चों का डेटा इकट्ठा करके विज्ञापन कंपनियों को बेचा था. बाद में ये आरोप सही साबित हुए और गूगल पर 170 मिलियन यूएस डॉलर यानी 1 हजार 326 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा था. यूट्यूब, गूगल की ​कंपनी है.

हालांकि इस मामले में गूगल असीस्टेंट से लोगों की बातें सुने जाने का शक है और ये बहुत गंभीर बात है.

दुनिया में गूगल असीस्टेंट के यूजर्स

जनवरी 2020 तक पूरी दुनिया में गूगल असीस्टेंट के 50 करोड़ यूजर्स थे, जो अब और भी बढ़ गए होंगे और ऐसा क्यों हुआ होगा, इसे भी आज आपको समझना चाहिए.

असल में पूरी दुनिया में बिकने वाले एंड्रॉयड मोबाइल फोन में गूगल असीस्टेंट का फीचर पहले से मौजूद होता है. यानी इसे डाउनलोड भी नहीं करना पड़ता और एंड्रॉयड मोबाइल फोन खरीदने वाले लोग न चाहते हुए भी इन कंपनियों के लिए प्रोडक्ट बन जाते हैं क्योंकि, कंपनी  उन्हीं का डेटा बेचकर पैसा कमाती है. इसके अलावा स्मार्ट होम डिवाइसेज और आईफोन में भी इसका ऐप डाउलोड हो सकता है. सरल शब्दों में कहें तो ये एक ऐसा खतरा है, जो मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए हमेशा रहेगा.

हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि दुनिया में इस समय 250 करोड़ एंड्रॉयड मोबाइल फोन हैं. यानी इन मोबाइल फोन्स में पहले से ही गूगल असीस्टेंट मौजूद है और गूगल इन लोगों की बातें आसानी से सुन सकता है.

 कैसे काम करता है गूगल असीस्टेंट

आज हमने इस विषय को लेकर गूगल को एक ईमेल लिखा और उससे उसका पक्ष जानने की कोशिश की. हमारे ई मेल के जवाब में गूगल ने हमसे एक लिंक शेयर किया और लिखा कि इसे पढ़ने के बाद आप समझ जाएंगे कि गूगल असीस्टेंट कैसे काम करता है. 

इस ईमेल में गूगल सीधे तौर पर ये जवाब देने से बचता नजर आया कि वो लोगों की बातें सुनता है या नहीं.

जब हमने उस लिंक को खोला तो हमें एक राइट अप मिला जिसका शीषर्क था, More information about our processes to safeguard speech data. इसके जरिए गूगल  ने हमें बताया कि उन्हें पता चला कि उनके किसी Launguage Reviewer ने एक गोपनीय डच  ऑडियो डेटा लीक करके गूगल की डेटा सिक्योरिटी पॉलिसी का उल्लंघन किया है और वो इसकी जांच कर रहे हैं. 

गूगल का कहना है कि Google Assistant आपके दिए कमांड के बाद ही आपके ऑडियो को गूगल को भेजता है. जैसे आप अगर Hey Google या Ok Google बोलकर या फिर गूगल असीस्टेंट का बटन दबाकर उससे इंटरैक्ट करने की कोशिश करते हैं. ये गूगल ने सफाई दी है.

डेटा को इन कंपनियों से कैसे बचा सकते हैं?

 

आज हम आपको कुछ ऐसी बातें भी बताना चाहते हैं, जिनकी मदद से आप अपने डेटा को इन कंपनियों से बचा सकते हैं. 

पहली बात- किसी भी ऐप का इस्तेमाल करने से पहले उसकी Terms and Condition जरूर पढ़ें.

दूसरी बात- सेटिंग्स में जाकर आप अपने डेटा को ऑटो डिलीट कर सकते हैं.

और तीसरी बात ये कि मोबाइल फोन की सेटिंग्स में जाकर माइक्रोफोन को बंद करके आप इससे बच सकते हैं.

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