Ujjain : महाकाल की नगरी में कांवड़ यात्रा पर रोक, छोटे रास्ते से निकलेगी बाबा की सवारी

धउज्जैन. हरिद्वार के बाद अब धार्मिक नगरी उज्जैन (Ujjain) में भी सावन में होने वाली कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी गयी है. कोरोना संक्रमण (Corona infection) और तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए ये फैसला लिया गया है. हर सावन सोमवार पर निकलने वाली बाबा महाकाल की सवारी भी इस साल छोटे रास्ते से निकलेगी. हर बार की तरह पूरे शहर का भ्रमण और ढोल-ढमाका इस बार नहीं होगा.

विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल के दर्शन के लिए रोज श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. दो दिन बाद सावन शुरू हो रहा है. सावन में यहां आने वाले भक्तों की तादाद एकदम बढ़ जाती है. हर साल देश विदेश से बड़ी तादाद में श्रद्धालु यहां आते हैं. हालांकि कोरोना प्रतिबंधों के कारण दो साल से इसका वैभव थोड़ा कम हो गया है.

शिव की आराधना का मास

मान्यता अनुसार सावन माह में भगवान विष्णु भगवान शिव को सृष्टि का भार सौंप देते हैं. 4 माह शिव ही संसार चलाते हैं. इसलिए सावन के इस मास को शिव की आराधना का मास माना जाता है. भक्त अपनी मनोकामना संग कावड़ लेकर बाबा को जल अर्पित करने आते हैं. लेकिन महामारी का दौर है इसलिए श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उज्जैन जिला प्रशासन ने जिले की राजस्व सीमा में धारा 144 के तहत कावड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है.

सवारी का मार्ग छोटा

महाकाल को उज्जैन का राजा कहा जाता है. वो सावन और भादों मास के हर सोमवार को अपने भक्तों का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं. महाकाल की सवारी धूमधाम से निकाली जाती है. लेकिन कोरोना के कारण प्रशासन ने सवारी का रास्ता भी छोटा कर दिया है. इसमें श्रद्धलुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा. हालांकि सावन के दौरान जिला प्रशासन मंदिर में ज्यादा श्रद्धालुओं को प्रवेश देने पर विचार कर रहा है. कोरोना कर्फ्यू हटने के बाद से अभी मंदिर में सिर्फ 3500 श्रद्धालुओं को प्रतिदिन प्रवेश दिया जा रहा है.

सावन में ऐसी रहेगी व्यवस्था

सावन में कावड़ यात्री और आमजनता के मंदिर में बाबा का जलाभिषेक करने पर रोक रहेगी. पिछले साल मंदिर प्रशासन ने कावड़ यात्री और श्रद्धालु बाबा को जो जल चढ़ाने के लिए लेकर आए थे उसे एक पात्र में डलवा लिया था. पात्र भरने पर उसे महाकाल को चढ़ा दिया गया था. कावड़ियों को भी आम जन की ही तरह मंदिर में प्री बुकिंग से दर्शन करवाए गए थे. इस बार मंदिर में क्या व्यवस्था होती है उसपर अंतिम निर्णय अभी बाकी है. प्री बुकिंग के साथ ही 251 रुपये में शीघ्र दर्शन की व्यवस्था भी रहेगी. मंदिर में आगामी आदेश तक भस्म आरती, संध्या और शयन आरती में भक्तों का प्रवेश बंद है.

सावन की मान्यताएं

हिंदू धर्म में सावन का महीना सबसे पवित्र माना जाता है. इस बार सावन 24 जुलाई को आषाढ़ मास के समाप्त होते ही 25 जुलाई से शुरू हो जाएगा जो 22 अगस्त तक चलेगा. सावन के महीने इस बार कुल 4 सोमवार पड़ेंगे. महाकाल की नगरी उज्जैन में सावन का अपना महत्व है. सावन के सभी सोमवार और भादौ माह की अमवस्या से पहले के सोमवार को भी महाकाल की सवारी निकाली जाती है. पिछले साल  कोरोना के कारण सवारी को पारम्परिक मार्ग से न निकालकर नये मार्ग से ले जाया गया था. किसी भी श्रद्धालु को सवारी में प्रवेश या देखने की अनुमति नहीं दी गई थी.

इस साल कुल सात सवारी

कोरोना के कारण इस साल भी श्रद्धालुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा. सवारी का रास्ता तो छोटा रहेगा लेकिन वो किस रास्ते से निकलेगी इस पर निर्णय अभी बाकी है.

पहली सवारी सावन का पहला सोमवार: 26 जुलाई 2021

दूसरी सवारी सावन का दूसरा सोमवार: 2 अगस्त 2021

तीसरी सवारी सावन का तीसरा सोमवार: 9 अगस्त 2021

चौथी सवारी सावन का चौथा सोमवार: 16 अगस्त 2021

सावन माह 22 अगस्त को खत्म होगा.

पांचवी सवारी 23 अगस्त सोमवार को भादौ माह

छटी सवारी 30 अगस्त सोमवार को भादौ माह

6 सितम्बर सोमवार को अंतिम शाही सवारी निकाली जाएगी.

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