Wednesday, December 1, 2021
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उत्तराखंड: जिस गांव में उड़कर पहुंचे थे संकटमोचक हनुमान, वहां अब बनने जा रही सड़क : Shivpurinews.in

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प्रमोद सेमवाल, अमर उजाला, गोपेश्वर
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 25 Nov 2021 01:24 PM IST

सार

तिब्बत सीमा क्षेत्र का सबसे दूरस्थ गांव द्रोणागिरी पर्यटन के साथ धार्मिक लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि संजीवनी बूटी की तलाश में हनुमान जी इसी गांव से पर्वत उठा कर ले गए थे।

सड़क
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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संजीवनी बूटी की तलाश में जिस गांव तक हनुमान जी उड़कर पहुंचे थे, वहां जल्द ही आप सड़क के जरिये पहुंच पाएंगे। चमोली जिले के पौराणिक द्रोणागिरी गांव तक पहुंच आसान बनाने के लिए जल्द ही ढाई किलोमीटर सड़क का निर्माण शुरू होने वाला है। यह काम पूरा होने के बाद गांव की सड़क से दूरी महज चार किलोमीटर रह जाएगी। पहले चरण में 6.6 किलोमीटर की सड़क बन चुकी है। लोक निर्माण विभाग का लक्ष्य जल्द ही गांव को सड़क से जोड़ने का है।

तिब्बत सीमा क्षेत्र का सबसे दूरस्थ गांव द्रोणागिरी पर्यटन के साथ धार्मिक लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि संजीवनी बूटी की तलाश में हनुमान जी इसी गांव से पर्वत उठा कर ले गए थे। द्रोणागिरी गांव पहाड़ों से घिरा हुआ है। यहां भोटिया जनजाति के 50 परिवार निवास करते हैं। द्रोणागिरी गांव के लिए वर्ष 2008 में शासन ने 6.6 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण की मंजूरी दी थी। इसके लिए 10 करोड़ 94 लाख रुपये भी स्वीकृत हुए। वर्ष 2020 में सड़क का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ।

इससे पहले ग्रामीणों को सड़क तक पहुंचने के लिए 12 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती थी। रास्ते में भूस्खलन जोन भी समस्या का कारण बना हुआ था। ग्रामीणों की मांग पर शासन ने सड़क का विस्तार कर ढाई किलोमीटर सड़क के निर्माण की स्वीकृति दी है। इसकी टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। यह काम पूरा होने के बाद द्रोणागिरी से सड़क महज चार किलोमीटर दूर रह जाएगी।  

प्रधान संगठन के जिला महामंत्री पुष्कर सिंह राणा का कहना है कि इस सड़क से द्रोणागिरी गांव के साथ ही गरपक, कागा और व्रींग गांव को भी यातायात का लाभ मिलेगा। लोनिवि के अधीक्षण अभियंता मुकेश परमार ने बताया कि द्रोणागिरी गांव तक सड़क पहुंचाने का लक्ष्य है। दूसरे चरण में ढाई किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। उच्च हिमालय क्षेत्र होने के कारण विषम भौगोलिक परिस्थितियों में सड़क निर्माण कार्य किसी चुनौति से कम नहीं है।

द्रोणागिरी के ग्रामीण आज भी हनुमान जी की पूजा नहीं करते हैं। मान्यता है कि संजीवनी बूटी की खोज में आए हनुमान द्रोणागिरी पर्वत का एक बड़ा हिस्सा उखाड़ ले गए थे। इस पर्वत को ग्रामीण पर्वत देवता के रूप में पूजते थे। इसीलिए गांव के लोग हनुमान जी की पूजा नहीं करते हैं। आज भी द्रोणागिरी गांव में रामलीला का आयोजन होता है, लेकिन हनुमान जन्म से पहले ही रामलीला मंचन को समाप्त कर दिया जाता है। ग्रामीण उदय सिंह रावत का कहना है कि ग्रामीण आज भी रामभक्त हनुमान से खफा हैं। गांव में हनुमान की पूजा नहीं होती है।

द्रोणागिरी में बनेगा संजीवनी गार्डन
वर्ष 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में राज्य स्थापना दिवस के मौके पर पौराणिक द्रोणागिरी गांव में संजीवनी गार्डन विकसित करने की घोषणा की थी। उसी दौरान उन्होंने गार्डन को तैयार करने के लिए 15 लाख की धनराशि भी स्वीकृत की थी।

विस्तार

संजीवनी बूटी की तलाश में जिस गांव तक हनुमान जी उड़कर पहुंचे थे, वहां जल्द ही आप सड़क के जरिये पहुंच पाएंगे। चमोली जिले के पौराणिक द्रोणागिरी गांव तक पहुंच आसान बनाने के लिए जल्द ही ढाई किलोमीटर सड़क का निर्माण शुरू होने वाला है। यह काम पूरा होने के बाद गांव की सड़क से दूरी महज चार किलोमीटर रह जाएगी। पहले चरण में 6.6 किलोमीटर की सड़क बन चुकी है। लोक निर्माण विभाग का लक्ष्य जल्द ही गांव को सड़क से जोड़ने का है।

तिब्बत सीमा क्षेत्र का सबसे दूरस्थ गांव द्रोणागिरी पर्यटन के साथ धार्मिक लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि संजीवनी बूटी की तलाश में हनुमान जी इसी गांव से पर्वत उठा कर ले गए थे। द्रोणागिरी गांव पहाड़ों से घिरा हुआ है। यहां भोटिया जनजाति के 50 परिवार निवास करते हैं। द्रोणागिरी गांव के लिए वर्ष 2008 में शासन ने 6.6 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण की मंजूरी दी थी। इसके लिए 10 करोड़ 94 लाख रुपये भी स्वीकृत हुए। वर्ष 2020 में सड़क का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ।

इससे पहले ग्रामीणों को सड़क तक पहुंचने के लिए 12 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती थी। रास्ते में भूस्खलन जोन भी समस्या का कारण बना हुआ था। ग्रामीणों की मांग पर शासन ने सड़क का विस्तार कर ढाई किलोमीटर सड़क के निर्माण की स्वीकृति दी है। इसकी टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। यह काम पूरा होने के बाद द्रोणागिरी से सड़क महज चार किलोमीटर दूर रह जाएगी।  

प्रधान संगठन के जिला महामंत्री पुष्कर सिंह राणा का कहना है कि इस सड़क से द्रोणागिरी गांव के साथ ही गरपक, कागा और व्रींग गांव को भी यातायात का लाभ मिलेगा। लोनिवि के अधीक्षण अभियंता मुकेश परमार ने बताया कि द्रोणागिरी गांव तक सड़क पहुंचाने का लक्ष्य है। दूसरे चरण में ढाई किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। उच्च हिमालय क्षेत्र होने के कारण विषम भौगोलिक परिस्थितियों में सड़क निर्माण कार्य किसी चुनौति से कम नहीं है।

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