Saturday, November 27, 2021
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देहरादून: स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग बढ़ाने पर जोर, लेकिन सार्वजनिक शौचालय बनाने को निगम के पास जगह ही नहीं  : Shivpurinews.in

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 25 Nov 2021 01:53 PM IST

सार

देहरादून नगर निगम मानकों के हिसाब से सार्वजनिक शौचालय को तो बनाना चाहता है। पैसा और प्लान सब तैयार हैं, लेकिन शहर में निगम को जगह ढूंढे नहीं मिल रही है।

सार्वजनिक शौचालय बनाने के लिए जगह तक नहीं
– फोटो : अमर उजाला

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स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंकिंग सुधारने को नगर निगम को सार्वजनिक शौचालयों पर ध्यान देने की दरकार है। निगम मानकों के हिसाब से सार्वजनिक शौचालय को तो बनाना चाहता है। पैसा और प्लान सब तैयार हैं, लेकिन शहर में निगम को जगह ढूंढे नहीं मिल रही है। कुछ जगहों पर हाईटेक शौचालय भी बनने हैं। मगर, इनके लिए निगम को कुछ जगहों पर अपनी भूमि नहीं मिल रही है। 

सार्वजनिक शौचालयों का होना बड़ा मानक
दरअसल, स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर हासिल करने के लिए सार्वजनिक शौचालयों का होना बड़ा मानक है। मानकों के हिसाब से हर कमर्शियल स्थान के आधा किलोमीटर की परिधि में एक सार्वजनिक शौचालय होना चाहिए। मगर, शहर में ज्यादातर स्थानों में ऐसा नहीं है। वर्तमान में नगर निगम के बनाए शहर में कुल 46 सार्वजनिक शौचालय मौजूद हैं। इनमें से कुछ तो जीर्ण-शीर्ण हालत में पहुंच गए हैं और कुछ पर कब्जा हो चुका है। ऐसे में इन्हें ठीक कराना भी निगम के लिए चुनौती भरा काम होगा। 

स्वच्छ सर्वेक्षण 2021: रैंकिंग में प्रदेश में नंबर वन आया देहरादून, लेकिन जगह-जगह पसरी गंदगी बयां कर रही अलग तस्वीर

मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कैलाश जोशी ने बताया कि शहर में सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण के लिए योजना तैयार की जा रही है। लेकिन, शहर में कहीं भी इनके निर्माण के लिए नगर निगम की भूमि उपलब्ध नहीं है। इस काम के लिए निगम के हर जिम्मेदार विभाग को भूमि तलाश में लगाया गया है। इसके लिए शहरी विकास निदेशालय में पांच करोड़ रुपये का बजट भी मौजूद है और डिटेल्ड प्राजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाकर भेजनी है। यदि इन शौचालयों का निर्माण हो जाता है तो अगले साल निश्चित तौर पर स्वच्छता सर्वेक्षण में नगर निगम की रैंकिंग और सुधर जाएगी। 

मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कैलाश जोशी ने बताया कि पांच हाईटेक शौचालयों का निर्माण भी किया जाना है। यह निर्माण हाईवे किनारे किए जाएंगे। इनमें एक हर्रावाला, एक मसूरी डायवर्जन, एक प्रेमनगर, एक आशारोड़ी और शिमला बाईपास पर बनाए जाएंगे। 

टूटे-फूटे शौचालयों को कराया जाएगा ठीक 
शहर में बहुत से सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति खराब हो चुकी है। इनमें कुछ टूट गए हैं और कुछ पर कब्जा हो चुका है। डॉ. जोशी ने बताया कि सबसे पहले इन शौचालयों की स्थिति को सुधारा जाएगा। इन्हें ठीक कराया जाएगा।

इसके लिए जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा। ताकि, सर्वेक्षण से पहले इन्हें पहले की स्थिति में लाया जा सके। उन्होंने बताया कि मेयर सुनील उनियाल गामा का इस साल सर्वेक्षण में शहर को टॉप 50 शहरों में शामिल करने का है। इसके लिए अभी से रणनीति बनाई जा रही है। 

विस्तार

स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंकिंग सुधारने को नगर निगम को सार्वजनिक शौचालयों पर ध्यान देने की दरकार है। निगम मानकों के हिसाब से सार्वजनिक शौचालय को तो बनाना चाहता है। पैसा और प्लान सब तैयार हैं, लेकिन शहर में निगम को जगह ढूंढे नहीं मिल रही है। कुछ जगहों पर हाईटेक शौचालय भी बनने हैं। मगर, इनके लिए निगम को कुछ जगहों पर अपनी भूमि नहीं मिल रही है। 

सार्वजनिक शौचालयों का होना बड़ा मानक

दरअसल, स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर हासिल करने के लिए सार्वजनिक शौचालयों का होना बड़ा मानक है। मानकों के हिसाब से हर कमर्शियल स्थान के आधा किलोमीटर की परिधि में एक सार्वजनिक शौचालय होना चाहिए। मगर, शहर में ज्यादातर स्थानों में ऐसा नहीं है। वर्तमान में नगर निगम के बनाए शहर में कुल 46 सार्वजनिक शौचालय मौजूद हैं। इनमें से कुछ तो जीर्ण-शीर्ण हालत में पहुंच गए हैं और कुछ पर कब्जा हो चुका है। ऐसे में इन्हें ठीक कराना भी निगम के लिए चुनौती भरा काम होगा। 

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मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कैलाश जोशी ने बताया कि शहर में सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण के लिए योजना तैयार की जा रही है। लेकिन, शहर में कहीं भी इनके निर्माण के लिए नगर निगम की भूमि उपलब्ध नहीं है। इस काम के लिए निगम के हर जिम्मेदार विभाग को भूमि तलाश में लगाया गया है। इसके लिए शहरी विकास निदेशालय में पांच करोड़ रुपये का बजट भी मौजूद है और डिटेल्ड प्राजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाकर भेजनी है। यदि इन शौचालयों का निर्माण हो जाता है तो अगले साल निश्चित तौर पर स्वच्छता सर्वेक्षण में नगर निगम की रैंकिंग और सुधर जाएगी। 

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