Thursday, December 2, 2021
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राजस्थान: एडीजीपी ने पुलिस कार्यालय परिसरों में पूजा स्थल नहीं बनाने के कानून का पालन सुनिश्चित कराने के एसपी को दिए निर्देश, भाजपा सांसद ने की आलोचना : Shivpurinews.in

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सार

राजस्थान के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (पुलिस आवास) ए पोन्नुचमी ने कहा  कि ‘राजस्थान धार्मिक भवन एवं स्थल अधिनियम 1954’ के तहत सार्वजनिक भवन में कोई धार्मिक स्थान नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों को इस अधिनियम का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
 

राजस्थान पुलिस (सांकेतिक तस्वीर)
– फोटो : सोशल मीडिया

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राजस्थान में सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, पुलिस कार्यालय परिसरों या पुलिस थानों में पूजा स्थलों के निर्माण को प्रतिबंधित करने वाले कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। वहीं भाजपा ने यह आदेश वापस लेने की मांग की है।

यह आदेश सोमवार को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (पुलिस आवास) ए पोन्नुचमी ने जारी किया। उन्होंने कहा कि ‘राजस्थान धार्मिक भवन एवं स्थल अधिनियम 1954 के तहत सार्वजनिक भवन में कोई धार्मिक स्थान नहीं हो सकता है। राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों को इस अधिनियम का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।’

भाजपा सांसद ने की आलोचना
एडीजीपी के इस आदेश की भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने कड़ी आलोचना की है। उन्होंने राज्य में कांग्रेस सरकार को “हिंदू विरोधी” करार दिया और निर्देश को वापस लेने की मांग की।

भाजपा सांसद मीणा ने कहा कि ‘पुलिस “बिगड़ती” कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालने के बजाय इस तरह के “अतार्किक आदेश” जारी करने में अपना समय और ऊर्जा बर्बाद कर रही है।’ मीणा ने कहा कि ‘पुलिस द्वारा जारी आदेश ने कांग्रेस सरकार के “हिंदू विरोधी” चेहरे को उजागर कर दिया है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।’

आदेश में पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों और अन्य इकाई प्रभारियों को ‘राजस्थान धार्मिक भवन एवं स्थल अधिनियम 1954’ का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

एडीजीपी ए पोन्नुचमी ने अपने आदेश में कहा है कि विगत कुछ वर्षों में पुलिस विभाग के विभिन्न प्रकार के कार्यालय परिसरों/ पुलिस थानों में आस्था के नाम पर जनसहभागिता से पूजा स्थल के निर्माण की प्रवृत्ति मे वृद्धि हुई है, जो विधि-सम्मत नहीं है।

उन्होंने कहा कि ‘राजस्थान धार्मिक भवन एवं स्थल अधिनियम 1954 सार्वजनिक स्थानों का धार्मिक उपयोग पर रोक लगाता है। इसके अतिरिक्त पुलिस थानों के प्रशासनिक भवनों के निर्माण के लिए तैयार एवं अनुमोदित नक्शे में भी पूजा स्थल के निर्माण का कोई प्रावधान नहीं है।’

राजस्थान में उपचुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी का दौर शुरू है। इसी दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने मंगलवार को कानून व्यवस्था को लेकर राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी को वोट देना अपराध बढ़ाने का लाइसेंस देने के समान है।

वल्लभनगर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव से पहले रैलियों को संबोधित करते हुए, सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को बताना चाहिए कि उन्होंने कोरोना वायरस संकट के दौरान कितनी बार निर्वाचन क्षेत्र का दौरा किया।

सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अब तक अपने तीन साल के शासन के दौरान 18 महीने तक अपना आवास नहीं छोड़ा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के शासन में विकास कार्य ठप हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को वोट देना अपराध और कुशासन में वृद्धि का लाइसेंस है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन लोग उनकी सच्चाई जानते हैं और उनके झूठे वादों के झांसे में नहीं आने वाले हैं।

राजस्थान के वल्लभनगर (उदयपुर) और धारियावाड़ (प्रतापगढ़) क्षेत्रों में मतदान 30 अक्तूबर को होगा और मतगणना दो नवंबर को होगी।

विस्तार

राजस्थान में सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, पुलिस कार्यालय परिसरों या पुलिस थानों में पूजा स्थलों के निर्माण को प्रतिबंधित करने वाले कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। वहीं भाजपा ने यह आदेश वापस लेने की मांग की है।

यह आदेश सोमवार को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (पुलिस आवास) ए पोन्नुचमी ने जारी किया। उन्होंने कहा कि ‘राजस्थान धार्मिक भवन एवं स्थल अधिनियम 1954 के तहत सार्वजनिक भवन में कोई धार्मिक स्थान नहीं हो सकता है। राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों को इस अधिनियम का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।’

भाजपा सांसद ने की आलोचना

एडीजीपी के इस आदेश की भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने कड़ी आलोचना की है। उन्होंने राज्य में कांग्रेस सरकार को “हिंदू विरोधी” करार दिया और निर्देश को वापस लेने की मांग की।

भाजपा सांसद मीणा ने कहा कि ‘पुलिस “बिगड़ती” कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालने के बजाय इस तरह के “अतार्किक आदेश” जारी करने में अपना समय और ऊर्जा बर्बाद कर रही है।’ मीणा ने कहा कि ‘पुलिस द्वारा जारी आदेश ने कांग्रेस सरकार के “हिंदू विरोधी” चेहरे को उजागर कर दिया है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।’

आदेश में पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों और अन्य इकाई प्रभारियों को ‘राजस्थान धार्मिक भवन एवं स्थल अधिनियम 1954’ का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

एडीजीपी ए पोन्नुचमी ने अपने आदेश में कहा है कि विगत कुछ वर्षों में पुलिस विभाग के विभिन्न प्रकार के कार्यालय परिसरों/ पुलिस थानों में आस्था के नाम पर जनसहभागिता से पूजा स्थल के निर्माण की प्रवृत्ति मे वृद्धि हुई है, जो विधि-सम्मत नहीं है।

उन्होंने कहा कि ‘राजस्थान धार्मिक भवन एवं स्थल अधिनियम 1954 सार्वजनिक स्थानों का धार्मिक उपयोग पर रोक लगाता है। इसके अतिरिक्त पुलिस थानों के प्रशासनिक भवनों के निर्माण के लिए तैयार एवं अनुमोदित नक्शे में भी पूजा स्थल के निर्माण का कोई प्रावधान नहीं है।’

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